Devi Mamta, Jyotiba Fule Jayanti

देवी ममता ने पुष्पमाला पहनाकर किया महात्मा ज्योतिबा फुले को याद

ज्योतिबा फुले की 193 वीं जयंती मनाई

समाज सुधारक फुले अपने क्रांतिकारी विचारों द्वारा हमारे बीच आज भी अमर है -देवी ममता


नागौर। हनुमान बाग में स्थित ज्योतिबा फुले पार्क में भारतीय सामाजिक क्रांति के जनक कहे जाने वाले महात्मा ज्योतिबा फुले की 193 वीं जंयती पर प्रसिद्ध कथा वाचिका देवी ममता ने उनकी मूर्ति पर पुष्पमाला पहनाकर व श्रद्धा सुमन अर्पित कर उन्हें याद किया।
ट्रस्ट मीडिया प्रभारी कंचन पंचारिया ने बताया की देवी ममता ने इस अवसर पर महात्मा ज्योतिबा फुले के संघर्षमय जीवन गाथा को एक मिसाल बताते हुए सभी को उनके बताए मार्ग पर, शिक्षाओं पर चलने का आवाहन किया। उन्होंने कहा कि वह एक महान विचारक, कार्यकर्ता, समाज सुधारक, लेखक, दार्शनिक, संपादक और क्रांतिकारी थे।
देवी ममता नें कहां की ज्योतिबा फुले नें जीवन भर महिलाओं और दलितो के उद्धार के लिए कार्य किया। इस कार्य में उनकी धर्मपत्नी सावित्री बाई फुले ने पूरा योगदान दिया। महात्मा फुले का बचपन अनेक कठिनाइयों में बीता और वह महज 9 माह के थे जब उनकी माँ का देहांत हो गया। आर्थिक तंगी के कारण खेतों में पिता का हाथ बटाने के लिए उन्हें छोटी उम्र में ही पढ़ाई छोड़नी पड़ी। लेकिन पड़ोसियों ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उनके कहने पर पिता ने उन्हें हाई स्कूल में दाखिला करा दिया।  समाजोत्थान के अपने मिशन पर कार्य करते हुए ज्योतिबा ने 24 सितंबर 1873 को अपने अनुयायियों के साथ ‘सत्यशोधक समाज’  नामक संस्था का निर्माण किया वह स्वयं इसके अध्यक्ष थे इस संस्था का मुख्य उद्देश्य शुद्रो और अति शुद्रोें को उच्च जातियों के शोषण से मुक्त करना था।
इस दौरान रामजस भाटी और इनकी धर्मपत्नि, हंसराज भाटी (वकील साहब),पी.टी. साहब भाटी, ताराचन्द सांखला, रोड़ाराम, पवन सोलंकी, सुरेश गहलोत, मुकेश भाटी, कंचन पंचारिया, कानाराम सांखला और सोहन राड़ इत्यादि समाज सेवी इस कार्यक्रम में उपस्थित थे। 

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