shobha yatra

कृष्ण सुदामा जैसी मित्रता वर्तमान में है दुर्लभ- देवी ममता

कथा के अंतिम दिवस पर स्व. शैलादेवी तरड़ की स्मृति में निकाली भव्य शोभायात्रा

जोधपुर। विश्व स्तरीय गो चिकित्सालय, जोधपुर में स्व. शैलादेवी तरड़ की पुण्य स्मृति में चल रही सात दिवसीय भागवत कथा के अंतिम दिवस पर श्री श्री 1008 महामण्डलेश्वर स्वामी कुशालगिरी जी महाराज के सानिध्य में गौ चिकित्सालय के परिसर की परिक्रमा करते हुए हरि कीर्तन के साथ कथा स्थल तक भव्य शोभायात्रा निकाली गई। जिसमें सैकड़ो की संख्या में महिलाएं व पुरुष शामिल हुए। इसके पश्चात स्व. शैलादेवी की यादगार में गोहितार्थ 20 लाख रूपयें की लागत से बनाया गया विशालकाय चारा गोदाम का स्वामीजी व देवीजी के कर कमलों द्वारा उदयराम स्वामी की उपस्थिति में उद्घाटन किया गया। कथा वाचिका देवी ममता देवीजी ने सुदामा चरित्र का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि संसार में मित्रता श्री कृष्ण और सुदामा की तरह होनी चाहिए। देवीजी ने बताया कि सुदामा के आने की खबर पाकर किस प्रकार श्रीकृष्ण दौड़ते हुए दरवाजे तक गए थे। ‘पानी परात को हाथ छुयो नहिं, नैनन के जल से पग धोए’। अर्थात श्री कृष्ण अपने बाल सखा सुदामा के आगमन पर उनके पैर धोने के लिए पानी मंगवाया परन्तु सुदामा की दुर्दशा को देखकर इतना दुख हुआ है कि प्रभु के आंसुओं से ही सुदामा के पैर धुल गए। आधुनिक युग में स्वार्थ के लिए लोग एक दूसरे के साथ मित्रता करते हैं और काम निकल जाने पर वे एक दुसरे को भूल जाते है। जीवन में प्रत्येक प्राणी को परमात्मा से एक रिश्ता जरूर बनाना चाहिए। भगवान से बनाया गया रिश्ता जीव को मोक्ष की ओर ले जाता है।
उन्होंने बताया कि स्वाभिमानी सुदामा ने विपरीत परिस्थितियों में भी अपने सखा कृष्ण का चिंतन और स्मरण नहीं छोड़ा जिसके फलस्वरूप कृष्ण ने भी सुदामा को परम पद प्रदान किया। सुदामा चरित्र की कथा का प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो गये। प्रसंगानुसार जसवंतगढ़ की प्रसिद्ध झांकी टीम द्वारा ‘भगवान की अन्नय भक्त करमा बाई’ व ‘कृष्ण सुदामा मिलन’ की दिव्य सजीव झांकियों का प्रस्तुतिकरण दिया गया।

21 अक्टूबर को नागौर में आयोजित भागवत कथा के पोस्टर का हुआ विमोचन

सच्ची श्रद्धा और साधना से होते है भगवान के दर्शन – महामण्डलेश्वर

bhagwat katha poster

कथा के मध्य श्री श्री 1008 महामण्डलेश्वर स्वामी कुशालगिरी जी महाराज ने विश्व स्तरीय गौ चिकित्सालय नागौर में बेनिवाल परिवार राबड़ीयाद द्वारा आयोजित होने वाली 21 अक्टूबर को सात दिवसीय भागवत कथा के पोस्टर का मंच पर विमोचन किया साथ ही उन्होंने आध्यात्मिक प्रवचन देते हुए बताया कि भगवान के दर्शन के लिए मन में सच्ची श्रद्धा और साधना जरूरी है। माधोसिंह गहलोत ने कोरोना काल में उत्कृष्ट कार्य करने वाले गो चिकित्सालय में कार्यरत कर्मचारियों को ‘कोरोना योद्धा’ सम्मान पत्र देकर मंच पर महामण्डलेश्वर के कर कमलों से सम्मानित करवाया। कथा विश्राम के दिन पंडाल में गोदान हेतु झोली फेराई गयी  जिसमें 1 लाख रूपयें से अधिक का गोहितार्थ सहयोग आया।
कथा प्रभारी श्रवण सेन ने बताया कि कथा के समापन के पश्चात् भक्तों ने महामण्डलेश्वर, देवीजी व कथा आयोजनकर्ता उदयराम स्वामी को छबड़ी में बैठाकर झूलाते हुए,पुष्पवर्षा करके भव्य मान सम्मान किया। अंतिम दिवस पर यजमान सुबेदार मेजर दामोदर शर्मा उनकी धर्मपत्नी कुसुमलता शर्मा बने। कथा के दौरान हेमाराम देवड़ा, दामोदर शर्मा, बस्तीराम राव, महिला मंडली मंडोर, सोहनसिंह गहलोत, हरीश दैया, नरेन्द्रसिंह गहलोत, छंवरलाल सुथार, सहित अनेक दानदाताओं ने गोहितार्थ सहयोग किया। सभी दानदाताओं का व्यास पीठ की ओर से स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। कथा लाइव के दौरान  भंवरलाल ढीगसरी, चन्द्रकला देवी, अंकित, पांचाराम इत्यादि गो भक्तों ने देश के अलग-अलग कोनो से ऑनलाइन सहयोग किया। कथा में आने वाले श्रद्धालुओं को चाय,पानी व बूंदी पकौड़ी का प्रसाद दिया गया, साथ ही कोरोना गाइडलाइन को ध्यान में रखते हुए श्रद्धालुओं को सामाजिक दुरी बनाकर बैठाया गया और सैनिटाइजर का उपयोग किया गया।

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